टाटा नैनो को गुजरात सरकार द्वारा बंगाल से शीन लेने के बाद गुजरात लगभग १ वर्ष पहले पूरी दुनिया में सुर्खियों में था. इससे पहले गुजरात ,दंगो और प्राकृतिक आपदाओं के लिए सुर्ख़ियों में रहता था .प्रकृति का दिया हुआ जख्म अभी भरा नहीं था की गुजरात सरकार ने लोगों के जख्मों को फिर से गोधरा कांड से हरा कर दिया . gujrat अब भय , अशांति और विपतियों के नाम से जाना जाने लगा .
जब 26 जनवरी 2001 को गुजरात में भूकंप आया , भारत में 8:46 पर 51 वा गणतंत्र दिवस. उपरिकेंद्र भुज (23.6 ° 69.8 N ° ई) था. रिक्टर पैमाने पर 7.6 और 8.1 के बीच की एक परिमाण के साथ, भूकंप 20,000 लोग (दक्षिण पूर्वी पाकिस्तान में 18 सहित) के आसपास मारे गए, 167,000 अन्य घायल हो गए और लगभग 400,000 घरों को नष्ट कर दिया. यह एक intraplate भूकंप, tha कि किसी भी प्लेट सीमा जहाँ प्लेट विवर्तनिकी अधिकांश भूकंप बनाते हैं, ताकि क्षेत्र में अच्छी तरह से तैयार नहीं किया गया था से एक दूरी पर हुआ था. घटना एक टक्कर मार्जिन में संग्रहित ऊर्जा का परिणाम था. तरंग को 700 किमी में फैल गया. 21 जिलों के प्रभावित थे और 600,000 लोग बेघर हो गए. प्रभाव.................
कच्छ में अंतिम मरने वालों की संख्या 12,220 थी. भुज, एक उपरिकेंद्र से केवल 20 किलोमीटर (14 मील) स्थित था, तबाह. काफी नुकसान भी भचाऊ में हुई. एक लाख ढांचे क्षतिग्रस्त हुए थे या कई ऐतिहासिक इमारतों और पर्यटक सहित नष्ट कर दिया, भूकंप घरों, आठ स्कूलों, दो अस्पतालों और भुज में 4 सड़क के किमी के 90% के आसपास नष्ट कर दिया और आंशिक रूप से शहर के ऐतिहासिक स्वामीनारायण मंदिर नष्ट कर दिया.. अहमदाबाद में गुजरात के 4.6 करोड़ की आबादी, के साथ वाणिज्यिक राजधानी के रूप में कई के रूप में 50 बहु - मंजिला इमारतों ढह गई और कई सौ लोग मारे गए थे. कुल संपत्ति का नुकसान 5.5 अरब डॉलर और बढ़ती पर अनुमान लगाया गया था. भूकंप ने प्रयोग करने योग्य भोजन और कच्छ में पानी की आपूर्ति 80% को नष्ट कर दिया. पूरी दुनिया ने उस वक्त भारत को हर संभव सहायता दी अमेरिका ,जापान ,पाकिस्तान जैसे देशों ने राहत सहायता के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया संघर्ष के रूप में यह राहत एक "मानसिकता" राहत नहीं थी परन्तु सामान्य जीवन की वापसी विलंब में इस राहत ने नई जिंदगियों को प्रोत्साहित किया.
इस लिए मैंने सबसे पहले कछ (भुज ) में जाने का फैंसला लिया ११ सितम्बर २०१० को मैंने देल्ली से भुज का सफ़र शुरू किया
सितम्बर १२ को मैं भुज पहुंचा भुज में सड़कों के दोनों तरफ की इमारतों पर ९ साल पहले के जख्म अब भी साफ़ देखे जा सकते हैं ३ से ४ मंजिला इमारतें अब भी भूकंप के डर को पैदा कर देती हैं कुछ इमारतों की छतों की टाइलें अब भी शतीग्रस्त देखाई दे रही हैं कई इमारतों में अब भी गहरी और लम्बी दरारें दीखाई दे रही हैं भाचऊ के आस पास के कुछ गावं तो बिलकुल शतिग्रस्त हो गये थे उन गावों का फिर दोबारा निर्माण किया गया . कई जगह पर मुझे इत्तिहासिक इमारतें भी खंडित नजर आए
इसके घटना ke बाद
धर्म क नाम पर दंगे करवाने वाले